Saturday, September 10, 2022

श्रीवत्स पीठ

 श्री #रामानुज_संप्रदाय की #वडकलै परंपरा के #अहोबिल_पीठ का अनुसरण करते हुए #नर्मदा_नदी के पावन तट पर तीर्थ भूमि #चांदोद (वडोदरा) के #चक्रपाणि_घाट पर लगभग 325 वर्ष पूर्व #धर्म_चक्रोदय #श्रीवत्स_मठ की स्थापना हुई । श्रीवत्स पीठ के प्रथमाचार्य श्री #श्रियाचार्य_स्वामीजी द्वारा गुजरात में ₹श्रीसंप्रदाय के #विशिष्टाद्वैत_सिद्धांत का संवर्धन किया गया । श्री श्रियाचार्य स्वामीजी के पश्चात् पंद्रह आचार्यों ने #श्रीवत्स_पीठ को समलंकृत किया । श्रीवत्स पीठ की आचार्य परंपरा में कई आचार्य त्रिकालदर्शी, #वचनसिद्ध, भक्ति परायण, ज्ञानी, वैराग्य निष्ठ, #कैंकर्य्य परायण महात्मा हुए जिन्होंने लोक कल्याण एवं #संस्कृति_संरक्षण के लिए श्रीवत्स पीठ अन्तर्गत 52 भव्य मंदिरों- देवस्थानो का निर्माण कर #पांचरात्र आगमानुसार भगवान के #श्रीविग्रहो की प्राणप्रतिष्ठा की । संवत् 2006 (ई.स. 1950) में पूजनीय श्री #अनिरुद्धाचार्य_वेंकटाचार्य जी महाराज श्रीवत्स पीठ के पंद्रहवे आचार्य के रुप में श्रीवत्स पीठ पर विराजित हुए । आपने अपनी तपस्या एवं विद्वत्ता के प्रभाव से श्री #रामानुज संप्रदाय एवं श्रीवत्स पीठ का वैभव वर्धन किया । संवत् 2053 ई. स. 1997) में परम पूज्य स्वामी श्री #वेंकटेशाचार्यजी_महाराज श्रीवत्स पीठ के सोलहवें #आचार्य के रुप में अभिषिक्त । आप बड़े ही उर्जावान्, कर्मठ एवं रचनात्मक कार्यों से श्रीवत्स पीठ के वैभव को दिग्दिगंत तक प्रसारित कर रहें है । धर्म चक्रोदय श्रीवत्स मठ के अंतर्गत सभी देवस्थानों को आपने अति भव्य स्वरूप प्रदान कर महती योगदान किया है । धार्मिक कार्यक्रमों हेतु प्रवास के अतिरिक्त आप #श्रीवेंकटेश_देवस्थान_बड़ौदा विराजते हैं । खांडल ज्ञाति काछवाल कुलोत्पन्न मूलत: सारड़ी निवासी युवा संत श्री पर समाज को गर्व है । पूज्य श्री #स्वामीजी के श्रीचरणों में सादर साष्टांग दंडवत प्रणाम








Thursday, August 18, 2022

गोवत्स बछ बारस) 2022 व्रत कथा

 

👉🌿गोवत्स (बछ बारस) 2022 व्रत 



बहुत समय पूर्व भारत में सुवर्णपुर नामक नगर में देव दानी राजा राज्य करता था. 🚩🚩उसके सवत्स एक गाय और एक भैस थी. राजा के दो रानियाँ थी गीता और सीता. सीता भैस से सहेली के समान तथा गीता बछड़े से सहेली और पुत्र का प्यार करती थी

🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴. एक दिन भैस सीता से बोली- हे रानी, गाय का बछड़ा होने से गीता रानी मुझसे इर्ष्या करती है. सीता ने कहा ऐसी बात है तो मैं सब ठीक


कर दूंगी.
सीता ने उसी दिन गाय के बछड़े को काटकर गेहू की राशि में गाड़ दिया. इसका किसी को पता न चला. राजा जब भोजन करने बैठा तब माँस की वर्षा होने लगी. चारो और महल में माँस और खून दिखाई देने लगा, जो भोजन की थाली थी. उसका सब भोजन मल मूत्र हो गया.

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ऐसा देखकर राज बहुत चिंतित हुआ, उसी समय आकाशवाणी हुई हे राजन, तेरी रानी सीता ने गाय के बछड़े को काटकर गेंहूँ की राशि में दबा दिया हैं, इसी से यह सब हो रहा हैं. कल गोवत्स द्वादशी हैं. इसलिए भैस को राज्य से बाहर करके गाय और बछड़े की पूजा करो.🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅
दूध तथा कटे फल मत खाना, इससे तेरा तप नष्ट हो जाएगा और बछड़ा भी जिन्दा हो जायेगा. सायंकाल जब गाय आई तब राजा पूजा करने लगा, जैसे ही मन में बछड़े को याद किया वैसे ही बछड़ा गेहूं के ढेर से निकलकर पास आ गया, यह देखकर राजा प्रसन्न हो गया. उसी समय से राजा ने आदेश कर दिया कि सभी गोवत्स द्वादशी का व्रत करे.

Friday, September 11, 2020

श्री राधे ज्योतिष दरबार, गवालू नागौर राजस्थान astrologer nagaur rajasthan

राधे राधे
आप सभी का स्वागत है ।।
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Astrologer gawaloo nagaur rajasthan
Bhagwat ktha, nani bai ka mayraa, ram ktha ,poojan, anusthan, vastu shastr

शादी विवाह योग

*विवाह योग में आ रही बाधा के लिये गणेशजी की सहस्त्रनाम से दूर्वा अर्चना*
🚩🚩राधे ज्योतिष दरबार गवालू(नागौर)🚩🚩
*सनातन संस्कृति में प्रत्येक शुभ कार्य के भगवान श्रीगणेश जी का सबसे पहले पूजन होता है । विघ्न के हर्ता सभी मनोरथ को पूरा करने वाले गणेश जी को देवता भी मनाते है । स्वयं देवगणों ने गणेशजी की अग्रपूजा का विधान बनाया है। शादी विवाह या मंगल कार्यों में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा करते हैं ।*
*अगर जन्म कुंडली में विवाह की बाधा किसी भी ग्रह की वजह से आ रही है तो भगवान गणेशजी के सहस्त्रनाम से दूर्वा अर्चना एवम अभिषेक करने से सभी बाधा दूर होती है व शीघ्र विवाह के योग बनते है।* 
*गणपति अथर्वशीर्ष से दूर्वा अर्चना करने से कुबेर भगवान की कृपा बरसती है और धन- धान्य में वृद्धि होती है ।।*
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Wednesday, July 29, 2020

रक्षाबंधन 2020

भारत मे वर्षभर में कई त्यौहार आते है प्रत्येक त्यौहार महत्वपूर्ण एवम विशेष है । इसी प्रकार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबन्धन त्योहार आता है ।भाई और बहिन के पवित्र और निःस्वार्थ प्रेम का त्‍योहार रक्षाबंधन है । इस वर्ष रक्षाबंधन 3 अगस्‍त 2020 ,वार सोमवार को है और इसी दिन श्रावण पूर्ण और आखिरी श्रावण सोमवार भी इसी दिन है ।
भारतीय ज्‍योतिष शास्त्र के अनुसार, बहन भाई के राखी बांधने के वक्‍त में भद्रा नहीं लगी होनी चाहिए,ऐसी मान्‍यता है कि रावण की बहन ने भद्राकाल में ही रावण के राखी बांधी थी और इसी कारण रावण का सर्वनाश हो गया। 
इस बार रक्षाबंधन 3 अगस्त को हे और भद्रा 2 अगस्त वार रविवार को रात्रि 9 बजकर 28 मिनट से भद्रा लगेगी जो 3 अगस्त सोमवार को सुबह 9:28 तक रहेगी ।
इसी बीच राहुकाल भी 3 अगस्त को सुबह 7:45 से 9:25 तक रहेगा ।।
 भद्रा भगवान सूर्यनारायण की पुत्री कहलाती हैं, जो किसी भी कार्य के लिए शुभ नहीं मानी जातीं।
इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना (covid-19)के कारण रक्षाबंधन मनाने के लिए बहुत से भाई-बहन का मिलना असम्भव है लेकिन चिंता की कोई बात नही इसके लिए बहनें भगवान कृष्‍ण को अपना भाई मानकर उन्‍हें राखी भेंट कर सकती हैं। इसके लिए आपको स्‍नान के बाद भगवान कृष्‍ण की तस्‍वीर के सामने राखी रख देनी चाहिए और प्रार्थना करनी चाहिए कि हे ईश्‍वर आप हमारी रक्षा करें। मेरे भाई को सदैव खुश रखें 
इससे आपका रक्षाबंधन का त्‍योहार भी सफल होगा और पुण्यकाल में भी वॄद्धि होगी ।

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें-
श्री राधे ज्योतिष दरबार,शास्त्री नगर,गवालू(नागौर)राज.
पं. कैलाश शास्त्री(खाण्डल)
जन्मकुंडली, वास्तु शास्त्र, यज्ञ,अनुष्ठान हेतु सम्पर्क
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Tuesday, July 7, 2020

श्रावण महीनें में भगवान भोलेनाथ का अभिषेक एवम महामृत्युंजय अनुष्ठान- पं. कैलाश शास्त्री(खाण्डल)

रुद्राभिषेक एवम महामृत्युंजय अनुष्ठान श्रावण महीने में
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◆ॐ नमः शिवाय◆
भक्तों के रखवाले भगवान भोलेनाथ की महिमा बड़ी ही निराली है । 
भगवान शिव के कई नाम है जिसमे महाकाल, भूतनाथ,शम्भू, रुद्र विशेष रूप से लेते है ।
रुद्र अर्थात भगवान शिव ।।
देवाधिदेव महादेव जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता है इस कारण  इन्हें भगवान आशुतोष कहा जाता है ।
भगवान भोलेनाथ अकाल मृत्यु को हरने वाले एवम जो इनकी आराधना करते है तो मौत को भी टाल देने वाले परम् दयालु परम् कृपालु भगवान शिव है ।
इसके लिए शास्त्रों में महामृत्युंजय मंत्र का लेख है जिसे मृतसंजीवनी भी कहा जाता है जो इस प्रकार है -
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः 
ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् 
उर्वारुकमिव बन्‍धनान् 
मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !! 

रुद्राभिषेक अर्थात भगवान भोलेनाथ का शुक्लयजुर्वेद के रुद्रष्टाध्यायी के मन्त्रों द्वारा अभिषेक करना ।
भगवान शिव का अभिषेक जब भी हमारी श्रद्धा हो तब करें हमेशा फलदायी ही होता है  लेकिन श्रावण महीना भगवान शिव का प्रिय मास है । इस कारण श्रावण मास में रुद्राभिषेक का हमारे शास्त्रों में विशेष महत्व बताया है ।। श्रावण के महीने में भक्तों के रखवाले भगवान शिव शम्भू का अभिषेक करना विशेष फलदायी एवं तुरत फल मिलता है। इसी कारण श्रावण मास में विशेष रुद्राभिषेक एवम महामृत्युंजय अनुष्ठान सबसे ज्यादा होते है ।
भगवान शिव शंकर की पूजा सनातन धर्म में भक्तों की भावना में  सबसे प्रभावशाली पूजा मानी जाती है । अनुष्ठान,बिल्वपत्र अर्चना, का फल हमें तुरन्त प्रभाव से मिलता है । भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सबसे सरल एवं आसान तरीका है रुद्राभिषेक करना💐💐
भगवान शिव का अभिषेक करने से सभी प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते है एवम सभी प्रकार के रोग दोष,कष्ट का निवारण होता है ।
शिव महापुराण में रुद्राभिषेक हेतु अलग-अलग द्रव्यों का विधान मिलता है -
शुद्ध पवित्र जल से अभिषेक  से इंद्रदेव प्रसन्न होकर वर्षा करते है ।
दुःख, शारीरिक रोगों का मुक्ति हेतु कुशा के जल से भोलेनाथ का अभिषेक करें ।
मकान एवम वाहन का सुख चाहते है तो दही से शिवजी का अभिषेक करें ।
गन्ने का अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी की कृपा बरसती है एवम कर्ज से मुक्ति मिलती है ।
मोक्ष प्राप्ति हेतु तीर्थों के जल से अभिषेक करें ।
पुत्र प्राप्ति हेतु गाय के दूध से अभिषेक करें
ज्यादा जानकारी के लिए सम्पर्क करें- 
*श्री राधे ज्योतिष दरबार, शास्त्री नगर,गवालू(नागौर)राज.*
*कथाव्यास कैलाश शास्त्री(खाण्डल)*
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Wednesday, June 3, 2020

#ग्रहण

राधे राधे
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
#ग्रहण को लेकर भ्रमित न हो, सही #जानकारी रखे और वही लोगों तक पहुँचायें
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साल 2020 में इन #तारीखों पर अगले ग्रहण -
1. 10-11 जनवरी - माद्य (उपच्छायी) चंद्रग्रहण - भारत में हुआ पर ग्रहण की श्रेणी में नहीं आता।
2. 5 जून 2020 - माद्य (#उपच्छायी) #चंद्रग्रहण - भारत में होगा, पर ग्रहण की श्रेणी में नहीं आता।
3. 21 जून 2020 - #कंकण/#खग्रास_सूर्यग्रहण - भारत में होगा, सूतक भी मान्य
4. 5 जुलाई 2020 - #माद्य (उपच्छायी) चंद्रग्रहण - भारत में होगा, पर ग्रहण की श्रेणी में नहीं आता। 
5. 30 नवंबर 2020 - माद्य (उपच्छायी) चंद्रग्रहण - भारत में होगा, पर ग्रहण की श्रेणी में नहीं आता। 
6. 14 दिसंबर 2020 - #खग्रास_सूर्यग्रहण - भारत के बाहर होगा, भारत में मान्य नहीं है।
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पं. कैलाश शास्त्री(खाण्डल)
श्री राधे ज्योतिष दरबार,
शास्त्री नगर,गवालू(नागौर)
श्रीमद्भागवत कथा,यज्ञ,अनुष्ठान,वास्तु शास्त्र, जन्मकुंडली, संगीतमय सुंदरकांड
हेतु सम्पर्क- 9001520008
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