डोकरा बाबा: गवालू गांव के संत की अद्भुत गाथा
भूमिका
राजस्थान के गवालू गांव में स्थित संत डोकरा बाबा का मंदिर आस्था और चमत्कार का केंद्र माना जाता है। डोकरा बाबा का जन्म ब्राह्मण समाज में खंडेलवाल(झुनझुनोदिया)गोत्र में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में निस्वार्थ सेवा और तपस्या का मार्ग अपनाया। उनकी प्रेरणादायक गाथा आज भी ग्रामीणों की श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक बनी हुई है।
डोकरा बाबा की तप
स्या और कुएं की कथा
कहते हैं कि डोकरा बाबा रोज़ सुबह जल्दी उठकर कुएं से पानी भरकर ले जाते थे। एक दिन जब वे देर से उठे, तो उन्होंने अपनी पत्नी को पानी लाने के लिए भेजा। लेकिन गांव वालों ने पानी देने से इनकार कर दिया और ताना मारा कि "अगर ज्यादा पानी चाहिए तो अपना कुआं खुद खुदवा लो।"
यह सुनकर डोकरा बाबा ने संकल्प लिया कि वे अपना कुआं खुद खोदेंगे। बिना जल और अन्न ग्रहण किए, केवल अपनी गाय के दूध पर जीवित रहकर, वे 40 दिनों तक लगातार खुदाई करते रहे। अंततः, उनकी कठिन तपस्या सफल हुई, और कुएं से शुद्ध जल निकला।
परंतु, इसी कुएं के अंदर बाबा ने समाधि ले ली और उनकी मृत्यु के बाद भी यह स्थान चमत्कारों से भरा रहा।
चमत्कारों की कहानियां
ग्रामीणों के अनुसार, यह कुआं कई चमत्कारी घटनाओं का साक्षी रहा है।
एक महिला कुएं में गिर गई, लेकिन उसे एक खरोंच तक नहीं आई।
कुछ समय बाद, एक बकरी भी कुएं में गिरी और सुरक्षित बाहर निकल आई।
ऐसा माना जाता है कि जो भी किसी रुकावट से परेशान हो, वह सच्चे मन से सात दिनों तक परिक्रमा करता है तो उसकी सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
मंदिर का निर्माण और वृक्षारोपण
ग्रामीणों ने मिलकर डोकरा बाबा का भव्य मंदिर बनवाया, और मंदिर के चारों ओर तीन तरह के पेड़ (20 फीट, 40 फीट और 60 फीट ऊंचाई के) लगाए। इस स्थान पर कुल 40,000 पेड़ लगाए गए हैं, जिससे यह क्षेत्र हरियाली से भर गया है।
डोकरा बाबा की मूर्ति की खोज
जब इस पवित्र स्थान की खुदाई की गई, तो यहां से 400-500 साल पुरानी डोकरा बाबा की मूर्ति प्राप्त हुई। यह मूर्ति आज भी मंदिर में स्थापित है और भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है।
डोकरा बाबा की सीख और संदेश
डोकरा बाबा का जीवन हमें संघर्ष, आत्मनिर्भरता और तपस्या की सीख देता है। उनकी कहानी बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और समर्पण से हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
निष्कर्ष
ग्वालु गांव में स्थित डोकरा बाबा का मंदिर एक आध्यात्मिक शक्ति केंद्र बन चुका है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और उनकी परिक्रमा कर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। डोकरा बाबा का जीवन हमें यह संदेश देता है कि अगर हम निश्चय कर लें, तो किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं।
डोकरा बाबा: तपस्या, आस्था और चमत्कार की अद्भुत गाथा
ग्वालु गांव के संत जिन्होंने 40 दिनों में बिना जल-अन्न के खुदाई कर निकाला जल
समाधि लेने के बाद भी कुएं से जुड़े चमत्कार, श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
मंदिर के चारों ओर 40,000 वृक्ष, 400-500 साल पुरानी मिली डोकरा बाबा की मूर्ति


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