Wednesday, July 29, 2020

रक्षाबंधन 2020

भारत मे वर्षभर में कई त्यौहार आते है प्रत्येक त्यौहार महत्वपूर्ण एवम विशेष है । इसी प्रकार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबन्धन त्योहार आता है ।भाई और बहिन के पवित्र और निःस्वार्थ प्रेम का त्‍योहार रक्षाबंधन है । इस वर्ष रक्षाबंधन 3 अगस्‍त 2020 ,वार सोमवार को है और इसी दिन श्रावण पूर्ण और आखिरी श्रावण सोमवार भी इसी दिन है ।
भारतीय ज्‍योतिष शास्त्र के अनुसार, बहन भाई के राखी बांधने के वक्‍त में भद्रा नहीं लगी होनी चाहिए,ऐसी मान्‍यता है कि रावण की बहन ने भद्राकाल में ही रावण के राखी बांधी थी और इसी कारण रावण का सर्वनाश हो गया। 
इस बार रक्षाबंधन 3 अगस्त को हे और भद्रा 2 अगस्त वार रविवार को रात्रि 9 बजकर 28 मिनट से भद्रा लगेगी जो 3 अगस्त सोमवार को सुबह 9:28 तक रहेगी ।
इसी बीच राहुकाल भी 3 अगस्त को सुबह 7:45 से 9:25 तक रहेगा ।।
 भद्रा भगवान सूर्यनारायण की पुत्री कहलाती हैं, जो किसी भी कार्य के लिए शुभ नहीं मानी जातीं।
इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना (covid-19)के कारण रक्षाबंधन मनाने के लिए बहुत से भाई-बहन का मिलना असम्भव है लेकिन चिंता की कोई बात नही इसके लिए बहनें भगवान कृष्‍ण को अपना भाई मानकर उन्‍हें राखी भेंट कर सकती हैं। इसके लिए आपको स्‍नान के बाद भगवान कृष्‍ण की तस्‍वीर के सामने राखी रख देनी चाहिए और प्रार्थना करनी चाहिए कि हे ईश्‍वर आप हमारी रक्षा करें। मेरे भाई को सदैव खुश रखें 
इससे आपका रक्षाबंधन का त्‍योहार भी सफल होगा और पुण्यकाल में भी वॄद्धि होगी ।

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें-
श्री राधे ज्योतिष दरबार,शास्त्री नगर,गवालू(नागौर)राज.
पं. कैलाश शास्त्री(खाण्डल)
जन्मकुंडली, वास्तु शास्त्र, यज्ञ,अनुष्ठान हेतु सम्पर्क
Whatsapp- 9001520008
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Tuesday, July 7, 2020

श्रावण महीनें में भगवान भोलेनाथ का अभिषेक एवम महामृत्युंजय अनुष्ठान- पं. कैलाश शास्त्री(खाण्डल)

रुद्राभिषेक एवम महामृत्युंजय अनुष्ठान श्रावण महीने में
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◆ॐ नमः शिवाय◆
भक्तों के रखवाले भगवान भोलेनाथ की महिमा बड़ी ही निराली है । 
भगवान शिव के कई नाम है जिसमे महाकाल, भूतनाथ,शम्भू, रुद्र विशेष रूप से लेते है ।
रुद्र अर्थात भगवान शिव ।।
देवाधिदेव महादेव जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता है इस कारण  इन्हें भगवान आशुतोष कहा जाता है ।
भगवान भोलेनाथ अकाल मृत्यु को हरने वाले एवम जो इनकी आराधना करते है तो मौत को भी टाल देने वाले परम् दयालु परम् कृपालु भगवान शिव है ।
इसके लिए शास्त्रों में महामृत्युंजय मंत्र का लेख है जिसे मृतसंजीवनी भी कहा जाता है जो इस प्रकार है -
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः 
ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् 
उर्वारुकमिव बन्‍धनान् 
मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !! 

रुद्राभिषेक अर्थात भगवान भोलेनाथ का शुक्लयजुर्वेद के रुद्रष्टाध्यायी के मन्त्रों द्वारा अभिषेक करना ।
भगवान शिव का अभिषेक जब भी हमारी श्रद्धा हो तब करें हमेशा फलदायी ही होता है  लेकिन श्रावण महीना भगवान शिव का प्रिय मास है । इस कारण श्रावण मास में रुद्राभिषेक का हमारे शास्त्रों में विशेष महत्व बताया है ।। श्रावण के महीने में भक्तों के रखवाले भगवान शिव शम्भू का अभिषेक करना विशेष फलदायी एवं तुरत फल मिलता है। इसी कारण श्रावण मास में विशेष रुद्राभिषेक एवम महामृत्युंजय अनुष्ठान सबसे ज्यादा होते है ।
भगवान शिव शंकर की पूजा सनातन धर्म में भक्तों की भावना में  सबसे प्रभावशाली पूजा मानी जाती है । अनुष्ठान,बिल्वपत्र अर्चना, का फल हमें तुरन्त प्रभाव से मिलता है । भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सबसे सरल एवं आसान तरीका है रुद्राभिषेक करना💐💐
भगवान शिव का अभिषेक करने से सभी प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते है एवम सभी प्रकार के रोग दोष,कष्ट का निवारण होता है ।
शिव महापुराण में रुद्राभिषेक हेतु अलग-अलग द्रव्यों का विधान मिलता है -
शुद्ध पवित्र जल से अभिषेक  से इंद्रदेव प्रसन्न होकर वर्षा करते है ।
दुःख, शारीरिक रोगों का मुक्ति हेतु कुशा के जल से भोलेनाथ का अभिषेक करें ।
मकान एवम वाहन का सुख चाहते है तो दही से शिवजी का अभिषेक करें ।
गन्ने का अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी की कृपा बरसती है एवम कर्ज से मुक्ति मिलती है ।
मोक्ष प्राप्ति हेतु तीर्थों के जल से अभिषेक करें ।
पुत्र प्राप्ति हेतु गाय के दूध से अभिषेक करें
ज्यादा जानकारी के लिए सम्पर्क करें- 
*श्री राधे ज्योतिष दरबार, शास्त्री नगर,गवालू(नागौर)राज.*
*कथाव्यास कैलाश शास्त्री(खाण्डल)*
श्रीमद्भागवत कथा, नानी बाई का मायरा, यज्ञ,अनुष्ठान ,वास्तु शास्त्र, जन्मकुंडली हेतु समपर्क
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