Saturday, August 24, 2024

ऊब छठ

भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की छठ

ऊब छठ का व्रत और पूजा विवाहित स्त्रियां पति की लंबी आयु के लिए तथा कुंआरी लड़कियां अच्छे पति की कामना के लिये करती है। भाद्र पद महीने की कृष्ण पक्ष की छठ (षष्टी तिथि) ऊब छठ होती है। ऊब छठ को चन्दन षष्टी , चन्ना छठ  और चाँद छठ के नाम से भी जाना जाता है।
✴️🕉️भगवान कृष्ण के भ्राता बलराम का जन्म दिन शनिवार
भाद्र पद महीने की कृष्ण पक्ष की छठ को ऊब छठ ‘चंदन षष्ठी’ के रूप में धूमधाम से मनाया जाएगा। शाम ढलने के बाद व्रत रखने वाली महिलाए और कुंआरी लड़कियां ने मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शन के साथ, परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करेंगी । महिलाए रात्रि में चंद्रोदय के बाद, अध्र्य देकर पूजा करने के बाद व्रत का पालना करेंगी।
💠ऊब छठ का व्रत रखने वाली महिलाए और कुंआरी लड़कियां सूर्यास्त के बाद से चंद्रोदय तक खड़े रहकर पौराणिक कथाओं का श्रवण करेंगी। साथ ही मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा अर्चना की जाएगी!
✴️✴️🕉️ऊब छठ क्यो कहते है🕉️✴️✴️
ऊब छठ के दिन मंदिर में भगवान की पूजा की जाती है। चाँद निकलने पर चाँद को अर्ध्य दिया जाता है। उसके बाद ही व्रत खोला जाता है। सूर्यास्त के बाद से लेकर चाँद के उदय होने तक खड़े रहते है। इसीलिए इसको ऊब छठ कहते है।
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कथाव्यास कैलाशजी शास्त्री(खांडल)
श्री राधे ज्योतिष दरबार,
शास्त्री नगर, गवालू (नागौर) राज.
Whatsapp 9001520008

Wednesday, January 11, 2023

Makar Sankranti 2023


मकर संक्रांति का वास 🚩

🙏🙏🙏🙏🙏🙏

१.लौकिक मतानुसार

रविवार - शाह वैश्य 

सोमवार धोबी रजक

मंगलवार कुम्हार

बुध गुरु शुक्र - माली वन 

शनिवार - दुष्ट जन , पापात्मा 

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२.मतान्तर सूत्र


वर्ष समय निवास यही मकर संक्रांति निवास भी


रोहिणी निवास अगर 


समुद्र - माली के घर 

संधि - वैश्य के घर 

पर्वत - कुम्हार के घर 

तट - धोभी के घर 

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वासा दुष्टमानव क्योंकि शनिवार को संक्रांति है 

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रोहिणी निवास -  सागर

समय निवास - माली गृह 

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 संक्रांति निवास और रोहिणी निवास के आधार पर निकले समय निवास दोनो ही अलग है !!!

Friday, December 30, 2022

तीतरी रामस्नेही रामद्वारा भागवत कथा by कथाव्यास कैलाशजी शास्त्री खांडल

 नागौर जिले के तीतरी गांव के रामद्वारा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का आनंद के साथ विश्राम हुआ।






इस अवसर पर कथा व्यास कैलाश शास्त्री खांडल ने भगवान श्रीकृष्ण तथा सुदामा के जीवन चरित्र,रूक्मणी विवाह,कंस वंध सहित अनेक विषयों पर विस्तार से श्रद्धालुओं को बताया

उन्होंने बताया कि जैसे कृष्ण ने सुदामा के साथ मित्रता धर्म निभाया हमें भी उनकी मित्रता का अनुसरण करना चाहिए

शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके  श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथा व्यास शास्त्री ने कहा कि सभ्य एवं संस्कारित समाज निर्माण के लिए सदैव गीता का अनुसरण करते रहना चाहिएं, जो काम प्रेम के माध्यम से संभव है, वह हिंसा से संभव नहीं हो सकता हैं।



कथाव्यास शास्त्री ने युवा वर्ग को नशे से दुर रहने की बात भी बताई और कहा कि नशे से हमारे शरीर का नुक़सान तथा बुद्धि का विनाश भी होता है जिससे आत्मिक शांति भी प्राप्त नहीं होती है। उन्होंने कहा कि हमें गौसेवा भी करनी चाहिए क्योंकि गाय मे ३३ कोटि देवताओं का वास होता है तथा गौसेवा सर्वश्रेष्ठ सेवा का माध्यम है और सात दिनों तक आयोजित भागवत कथा में भजन गायक अनिल सैन, सुनिता स्वामी ने भी कथा पांडाल में भजनों की प्रस्तुति दी जिससे श्रद्धालु खुशी से नृत्य करते दिखे। 

इस सात दिवसीय भागवत कथा में तीतरी जोधियासी सहित आस-पास के अनेकों गांव के श्रद्धालुओं सहित काफी संख्या में महिला-पुरूष भक्तों ने इस कथा का आनंद उठाया। सात दिनों तक आयोजित इस पावन कथा में पुरा वातावरण भक्तिमय रहा।

Saturday, September 10, 2022

श्रीवत्स पीठ

 श्री #रामानुज_संप्रदाय की #वडकलै परंपरा के #अहोबिल_पीठ का अनुसरण करते हुए #नर्मदा_नदी के पावन तट पर तीर्थ भूमि #चांदोद (वडोदरा) के #चक्रपाणि_घाट पर लगभग 325 वर्ष पूर्व #धर्म_चक्रोदय #श्रीवत्स_मठ की स्थापना हुई । श्रीवत्स पीठ के प्रथमाचार्य श्री #श्रियाचार्य_स्वामीजी द्वारा गुजरात में ₹श्रीसंप्रदाय के #विशिष्टाद्वैत_सिद्धांत का संवर्धन किया गया । श्री श्रियाचार्य स्वामीजी के पश्चात् पंद्रह आचार्यों ने #श्रीवत्स_पीठ को समलंकृत किया । श्रीवत्स पीठ की आचार्य परंपरा में कई आचार्य त्रिकालदर्शी, #वचनसिद्ध, भक्ति परायण, ज्ञानी, वैराग्य निष्ठ, #कैंकर्य्य परायण महात्मा हुए जिन्होंने लोक कल्याण एवं #संस्कृति_संरक्षण के लिए श्रीवत्स पीठ अन्तर्गत 52 भव्य मंदिरों- देवस्थानो का निर्माण कर #पांचरात्र आगमानुसार भगवान के #श्रीविग्रहो की प्राणप्रतिष्ठा की । संवत् 2006 (ई.स. 1950) में पूजनीय श्री #अनिरुद्धाचार्य_वेंकटाचार्य जी महाराज श्रीवत्स पीठ के पंद्रहवे आचार्य के रुप में श्रीवत्स पीठ पर विराजित हुए । आपने अपनी तपस्या एवं विद्वत्ता के प्रभाव से श्री #रामानुज संप्रदाय एवं श्रीवत्स पीठ का वैभव वर्धन किया । संवत् 2053 ई. स. 1997) में परम पूज्य स्वामी श्री #वेंकटेशाचार्यजी_महाराज श्रीवत्स पीठ के सोलहवें #आचार्य के रुप में अभिषिक्त । आप बड़े ही उर्जावान्, कर्मठ एवं रचनात्मक कार्यों से श्रीवत्स पीठ के वैभव को दिग्दिगंत तक प्रसारित कर रहें है । धर्म चक्रोदय श्रीवत्स मठ के अंतर्गत सभी देवस्थानों को आपने अति भव्य स्वरूप प्रदान कर महती योगदान किया है । धार्मिक कार्यक्रमों हेतु प्रवास के अतिरिक्त आप #श्रीवेंकटेश_देवस्थान_बड़ौदा विराजते हैं । खांडल ज्ञाति काछवाल कुलोत्पन्न मूलत: सारड़ी निवासी युवा संत श्री पर समाज को गर्व है । पूज्य श्री #स्वामीजी के श्रीचरणों में सादर साष्टांग दंडवत प्रणाम








Thursday, August 18, 2022

गोवत्स बछ बारस) 2022 व्रत कथा

 

👉🌿गोवत्स (बछ बारस) 2022 व्रत 



बहुत समय पूर्व भारत में सुवर्णपुर नामक नगर में देव दानी राजा राज्य करता था. 🚩🚩उसके सवत्स एक गाय और एक भैस थी. राजा के दो रानियाँ थी गीता और सीता. सीता भैस से सहेली के समान तथा गीता बछड़े से सहेली और पुत्र का प्यार करती थी

🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴. एक दिन भैस सीता से बोली- हे रानी, गाय का बछड़ा होने से गीता रानी मुझसे इर्ष्या करती है. सीता ने कहा ऐसी बात है तो मैं सब ठीक


कर दूंगी.
सीता ने उसी दिन गाय के बछड़े को काटकर गेहू की राशि में गाड़ दिया. इसका किसी को पता न चला. राजा जब भोजन करने बैठा तब माँस की वर्षा होने लगी. चारो और महल में माँस और खून दिखाई देने लगा, जो भोजन की थाली थी. उसका सब भोजन मल मूत्र हो गया.

🙏🙏🙏🙏
ऐसा देखकर राज बहुत चिंतित हुआ, उसी समय आकाशवाणी हुई हे राजन, तेरी रानी सीता ने गाय के बछड़े को काटकर गेंहूँ की राशि में दबा दिया हैं, इसी से यह सब हो रहा हैं. कल गोवत्स द्वादशी हैं. इसलिए भैस को राज्य से बाहर करके गाय और बछड़े की पूजा करो.🌅🌅🌅🌅🌅🌅🌅
दूध तथा कटे फल मत खाना, इससे तेरा तप नष्ट हो जाएगा और बछड़ा भी जिन्दा हो जायेगा. सायंकाल जब गाय आई तब राजा पूजा करने लगा, जैसे ही मन में बछड़े को याद किया वैसे ही बछड़ा गेहूं के ढेर से निकलकर पास आ गया, यह देखकर राजा प्रसन्न हो गया. उसी समय से राजा ने आदेश कर दिया कि सभी गोवत्स द्वादशी का व्रत करे.

Friday, September 11, 2020

श्री राधे ज्योतिष दरबार, गवालू नागौर राजस्थान astrologer nagaur rajasthan

राधे राधे
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Astrologer gawaloo nagaur rajasthan
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शादी विवाह योग

*विवाह योग में आ रही बाधा के लिये गणेशजी की सहस्त्रनाम से दूर्वा अर्चना*
🚩🚩राधे ज्योतिष दरबार गवालू(नागौर)🚩🚩
*सनातन संस्कृति में प्रत्येक शुभ कार्य के भगवान श्रीगणेश जी का सबसे पहले पूजन होता है । विघ्न के हर्ता सभी मनोरथ को पूरा करने वाले गणेश जी को देवता भी मनाते है । स्वयं देवगणों ने गणेशजी की अग्रपूजा का विधान बनाया है। शादी विवाह या मंगल कार्यों में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा करते हैं ।*
*अगर जन्म कुंडली में विवाह की बाधा किसी भी ग्रह की वजह से आ रही है तो भगवान गणेशजी के सहस्त्रनाम से दूर्वा अर्चना एवम अभिषेक करने से सभी बाधा दूर होती है व शीघ्र विवाह के योग बनते है।* 
*गणपति अथर्वशीर्ष से दूर्वा अर्चना करने से कुबेर भगवान की कृपा बरसती है और धन- धान्य में वृद्धि होती है ।।*
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