Tuesday, February 18, 2020

महाशिवरात्रि 2020

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*शिव रुद्राभिषेक का अर्थ भगवान रुद्र का अभिषेक यानी कि शिवलिंग पर भगवान रुद्र के मंत्रों का उच्चारण करते हुए अभिषेक करना, अभिषेक के कई रूप व प्रकार होते हैं। श्रेष्ठ ब्राह्मणों द्वारा रुद्राभिषेक करवाना शिवजी को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका है।* ✳️✳️✳️✳️✳️✳️✳️
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Monday, December 30, 2019

भागवत कथा

राधे राधे सा
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भागवत कथा

राधे राधे
पांचवे दिन की कथा की झलकियां ।
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Bhagwat ktha, nani bai ro mayro

Tuesday, December 3, 2019

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Monday, November 18, 2019

भागवतचार्य

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Friday, September 20, 2019

Navratri - नवरात्रि 2019

नवरात्रि शब्द 'नव अहोरात्रों' यानी विशेष रात्रियों का ज्ञान होता है । नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा उपासना होती है ।  *********************,
नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त - आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा , रविवार, 29 सितम्बर 2019
समय-  प्रातः  9:30 से 12:28 तक लाभ-अमृत वेला
  दोपहर - 12:04 से 12:52 अभिजीत मुहूर्त

रात्रि शब्द सिद्धि का भी प्रतीक माना जाता है । देवी की उपासना प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि,नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ की जाती है । नवरात्रि वर्ष में चार बार होती है- चैत्र,आषाढ़ ,आश्विन,पोष ।
इनमें आषाढ़ ओर पोष मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के रूप में होती है । नौ दिनों में नवदुर्गा की पूजा महाकाली, महालक्ष्मी,महासरस्वती के रूपों की पूजा होती है ।
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी ।
तृतीयं चद्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पञ्चमं स्कन्दमातेती षष्ठम् कात्यायनी च ।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिताः ।।
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इस प्रकार नवदुर्गा ओर दस महाविद्याओं में महाकाली को प्रमुख माना जाता है ।
नवरात्रि में दुर्गासप्तशती का पाठ करना अनन्त पुण्य ओर फलदायी होता है ।
इसे दुर्गा ओर चंडीपाठ भी कहा जाता है ।।
दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान सौ पाठ से शतचण्डी , हजार पाठ से सहस्त्र चण्डी, लाख पाठ से लक्षचण्डी इस प्रकार विशेष अनुष्ठान किये जाते है ।
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आश्विन मास में जो नवरात्रि आती है उसे शारदीय नवरात्रि भी कहा जाता है । दुर्गासप्तशती के 12 वां अध्याय में 12-13 श्लोक जिसमे देवी खुद कहती है -
''शरत्काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी ।
तस्यां ममैतन्महात्म्यम् श्रुत्वा भक्तिसमन्वित: ।।
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय ।।
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◆शरत्काल में जो वार्षिक महापूजा की जाती है उस पर्व पर मेरे जो इस माहात्म्य को भक्तिपूर्वक सुनेगा,वह मनुष्य मेरे प्रसाद से सब बाधाओं के मुक्त होकर धन-धान्य तथा पुत्र से सम्पन्न होगा इसमें तनिक भी संदेह नही है ।
●यह माहात्म्य दुर्गासप्तशती के नाम से प्रसिद्ध है ।
दुर्गा पाठ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों पुरुषार्थ प्रदान करने वाला है । माता का भक्त भाव,श्रद्धा और जिस कामना से साथ सप्तशति का पारायण करता है उसे उसी भावना के अनुरूप निश्चय फल सिद्धि होती है । इस प्रकार नौ दिन तक देवी के स्वरूपों का पूजन करें । नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा होती है । इस दिन योगी,सिद्धपुरुष कई प्रकार मन्त्रों की सिद्धि भी करते है । इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवम हवन करना चाहिये । आहुति में दुर्गा का मूल मंत्र जिसे नवार्ण मन्त्र कहा जाता है ।
" ॐ ऐम् ह्रीं क्लीम् चामुण्डायै विच्चे ''
इस मन्त्र से भी आहुति देनी चाहिये । देवी सभी भक्तों को साधना और तप के प्रभाव से लौकिक ओर परलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति करती है । नवें दिन फल,हलवा,पूड़ी, काले चने ओर नारियल का भोग लगाया जाता है । उसके बाद कंवारी कन्याओं ओर ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिये, मां के प्रसाद के साथ चरण स्पर्श कर दान-दक्षिणा देनी चाहिये । इस भोजन के बाद मां को विदाई दी जाती है यानी उतरपूजन किया जाता है ।
■या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
★★★★★■■■■■★★★★★
विशेष पूजन,अर्चना,दुर्गा पाठ एवम अन्य पूजन समन्धित अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क-
भागवताचार्य कैलाश जी शास्त्री(खाण्डल)
श्री राधे ज्योतिष दरबार
शास्त्री नगर,गवालू (नागौर)राजस्थान
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