Thursday, April 10, 2025

 यदि हमारे पूर्वजो को हवाई जहाज बनाना नहीं आता, तो हमारे पास "विमान" शब्द भी नहीं होता। 


यदि हमारे पूर्वजों को Electricity की जानकारी नहीं थी, तो हमारे पास "विद्युत" शब्द भी नहीं होता। 


यदि "Telephone" जैसी तकनीक  प्राचीन भारत में नहीं थी तो,  "दूरसंचार" शब्द हमारे पास क्यो है। 


Atom और electron की जानकारी नहीं थी तो अणु और परमाणू शब्द कहा से आए। 


Surgery का ज्ञान नहीं था तो, "शल्य चिकितसा" शब्द कहा ये आया। 


विमान,  विद्युत, दूरसंचार ,  ये शब्द स्पष्ट प्रमाण है, कि ये तकनीक भी हमारे पास थी। 


फिसिक्स के सारे शब्द आपको हिन्दी में मिल जाएगे। 


बिना परिभाषा के कोई शब्द अस्तित्व में रह नहीं सकता। 


सौरमंडल में नौ ग्रह है व सभी सूर्य की परिक्रमा लगा रहे है, व बह्ममांड अनंत है, ये हमारे पूर्वजो को बहुत पहले से पता था। रामचरित्र मानस में काक भुशुंडि - गरुड संवाद पढिए, बह्ममांड का ऐसा वर्णन है, जो आज के विज्ञान को भी नहीं पता।


अंग्रेज जब 17-18 सदी में भारत आये तभी उन्होने विज्ञान सीखा,  17 सदी के पहले का आपको कोई साइंटिस्ट नहीं मिलेगा,  


17 -18 सदी के पहले कोई अविश्कार यूरोप में नहीं हुआ, भारत आकर सीखकर, और चुराकर अंग्रेजो ने अविश्कार करे। 


भारत से सिर्फ सोने चांदी की ही लूट नहीं हुई, ज्ञान के भंडार की भी लूट हुई है। 


वेद ही विज्ञान है और हमारे ऋषि ही वैज्ञानिक है


[जय सनातन संस्कृति ]

 सूर्य सहस्त्रनाम का पाठ करने से जीवन में मान सम्मान, यश कीर्ति, धन दौलत, स्वास्थ्य, संतान, भोग और मोक्ष सभी प्राप्त होते हैं। 


रविवार के दिन शक्ति, सेहत और आरोग्य का वरदान देने वाली सूर्य की पूजा का बहुत महत्व है। प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य को सृष्टि का प्राण कहा गया है। 


प्रतिदिन साक्षात दर्शन देने वाले भगवान सूर्य के कारण ही पृथ्वी पर जीवन है। सूर्य की साधना को हिन्दू पंरपरा में अत्यंत आवश्यक मानते हुए पुण्य दायी माना गया है, उसी सूर्य की किरणों से मिलने वाले लाभ को विज्ञान ने भी आवश्यक माना है, क्योंकि सूर्य हमें स्वस्थ रखते हुए हमारे सौंदर्य को भी बढ़ता है। 


प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व ही शैया त्यागकर शौच –स्नान करना चाहिए


सूर्य की साधना करने के लिए सूर्योदय से पहले उठने का प्रयास करें और शौच आदि से निवृत्त होकर सबसे पहले सूर्यदेव को अर्घ्य देकर तीन बार प्रणाम करें।


सूर्य के साधक को प्रतिदिन उनके शतनाम और स्तोत्र अथवा सहस्त्रनाम का श्रद्धा पूर्वक पाठ करना चाहिए तथा उनके मंत्र का जाप करना चाहिए। सूर्य के साधक को प्रतिदिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए. इसका पाठ करने से भगवान सूर्यदेव की कृपा शीघ्र ही प्राप्त होती है।


सूर्य के साधक को सूर्यदेव की विशेष कृपा पाने के लिए रविवार के दिन विधि-विधान से व्रत रखना चाहिए और रविवार के दिन तेल, नमक आदि नहीं खाना चाहिए।

 

सूर्य के साधक को रविवार का व्रत करते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।


सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए प्रतिदिन श्रीखंड, चंदन अथवा रक्त चंदन का तिलक लगाएं।


यदि आपकी कुंडली में सूर्य अशुभ फल दे रहा है तो, आप उसकी शुभता को पाने के लिए अपने गले तांबे का सिक्का धारण करें। तांबे के सिक्के को लाल धागे में ही धारण करें। 


ज्योतिष में सूर्य से जुड़ी अशुभता को दूर और शुभता को प्राप्त करने के लिए रविवार के दिन गेहू, तांबा, घी, स्वर्ण और गुड़ के दान का उपाय बताया गया है।


यदि आप चाहते हैं कि, आपकी आंखें हमेशा स्वस्थ रहें या फिर आंखों से जुड़ी किसी बीमारी शीघ्र ही दूर हो तो उसके लिए अपनी आंखों का इलाज कराते हुए सूर्य की साधना भी प्रतिदिन करें। नेत्ररोग से बचने और उसकी रक्षा के लिए प्रतिदिन नेत्रोपनिषद का श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए।


सूर्य देव को प्रणाम करने से क्या होता है ?


सुबह सवेरे उगते हुए सूर्य को प्रणाम करने और दर्शन करने से हमारे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, हमारी दिनचर्या नियमित बनती है, कारोबार एवं नौकरी में सफलता प्राप्त होती है, इसके लिए प्रातः काल उठकर सूर्यदेव को नमन करना चाहिए।


सूर्य सिद्धि कैसे करें ?


शास्त्रों की मान्यता के अनुसार सूर्योदय के प्रथम किरण में सूर्यदेव को अर्घ्य देना सबसे उत्तम माना गया है। इसके लिए सर्वप्रथम प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व नित्य-क्रिया से निवृत्त्य होकर स्नान करें, उसके बाद उगते हुए सूर्य के सामने आसन लगाए, पुनः आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में पवित्र जल लें।


सूर्य देव को कौन सी वस्तु चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं ?


माना जाता है प्रसाद में मिश्री चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य को अर्घ्य देते समय जल में मिश्री डालकर जल चढ़ाने से सूर्य देवता की कृपा बनी रहती है।


सूर्य को एक्टिवेट कैसे करें ?


अपने सरलतम रूप में, यह सूर्य भेदन प्राणायाम अभ्यास दाएं नथुने से सांस लेकर, सांस रोककर और बाएं नथुने से सांस छोड़कर किया जाता है। दायां नथुना पिंगला नाड़ी से जुड़ा होता है - शरीर में एक ऊर्जावान चैनल जो मूलाधार चक्र से शुरू होता है, और दाएं नथुने में समाप्त होता है।


सूर्य भगवान को जल में गुड़ डालकर चढ़ाने से क्या होता है ?


यदि आप किसी बीमारी से परेशान हैं तो ऐसे में सूर्य देव को जल में गुड़ मिलाकर चढ़ाना बहुत ही शुभ होता है। ऐसा करने से बीमारियों से राहत मिलती है। वहीं अगर किसी व्यक्ति को नींद आने में परेशानी या ब्लड प्रेशर की समस्या है तो, उसे जल में कच्चा दूध मिलाकर सूर्य देव को चढ़ाना चाहिए। इससे लाभ मिलता है।


सूर्य को जल कब नहीं देना चाहिए ?


सूर्य की रोशनी जब चुभने लगे तब जल देना अनुकूल नहीं होता है,अर्घ्य देने के बाद मंत्र जाप करने से विशेष लाभ होता है, बिना स्नान किए हुए अर्घ्य नहीं देना चाहिए।


सूर्य को जल देने वाले लोटे में क्या डालें ?


भविष्य पुराण के अनुसार रोज सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें, इसमें चावल, फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। जल अर्पित करते समय सूर्य मंत्र का जाप करें। इस जाप के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना करना चाहिए।


सूर्य देवता के चमत्कारी इक्कीस नाम का नित्य पाठ करने से जीवन में चमत्कारी परिवर्तन होते हैं।


1. विकर्तन, 2. विवस्वान, 3.मार्तण्ड, 4. भास्कर, 5. रवि


6. लोकप्रकाशक, 7. श्रीमान, 8. लोकचक्षु, 9. महेश्वर, 10. लोकसाक्षी, 11. त्रिलोके, 12. कर्ता, 13. हर्ता

14. तमिस्रहा, 15. तपन, 16. तापन, 17. शुचि,

18. सप्ताश्ववाहन, 19. गभस्तिहस्त, 20. ब्रह्मा, 

21. सर्वदेवनमस्कृत।


अनुष्टुप छ्न्द शपर आधारित ये ढाई श्लोक हैं, जिनका एक बार पठन सहस्र सूर्य नाम जप के समान फलदायी है। ये ढाई श्लोक किसी स्तोत्र से कम नहीं है। इन श्लोकों को भलि भांति कण्ठस्थ करके और सुबह शाम इसके पाठ का नियम बना लेना चाहिये।


सूर्य देव को अपने अनुकूल बनाने के लिए नियमित रूप से सूर्य कवच, सूर्य स्तोत्र, सूर्य सहस्त्रनाम और मंत्रों का विधि पूर्वक होकर जाप करना चाहिए।


नोट:---यदि आपकी जन्म कुंडली में उपरोक्त कोई समस्या है तो, आप अपनी जन्म कुंडली अवश्य दिखाएं और बताए हुए उपाय कीजिए, निश्चित रूप से आपको लाभ होगा, जीवन में चल रही परेशानियों से छुटकारा मिलेगा।

 श्रीसंकटमोचन

     काले हनुमानजी

         की आरती:-

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अतुलितबलधामं

कृष्णशैलाभदेहम्,

 दनुजवनकृशानुं

विघ्नविच्छेदहेतुम्।

स्मरतिहृदिहरिं स

धारयन्तं गदां च

रघुपति प्रिय भक्तं

त्वांजनेयं नमामि।।

           🕉️

जय अंजनि नन्दन,

        कलुष विभंजन,

श्याम रूप हनुमाना।

भक्तन रखवारे,

           असुर संहारे,

   धारे काला बाना।।

अहिरावण मारे,

           भुजा उपारे ,

रावणकुल कियो अंता

हौं शरणहिं आयो,

   अति सुख पायो ,

पायो कपि बलवंता।।

        ।।टेर।।

अतुलित बल धामा ,

         हिय सियरामा,

आश्रय दो कपि काले,

तुम सुत सियकंता,

        कलि भगवन्ता,

 सोहत रूप निराले।

सब शत्रु विनासी,

          काशी वासी,

संकटमोचन नामा।

मथुरा अपनावहुँ,

         राम मिलावहुँ,

कृष्ण रंग रसधामा।।

         ।।टेर।।

 महावीर जयन्ती 

हनुमान जयन्ती 

परशुराम जयन्ती 

कृष्ण जन्माष्टमी - जयन्ती विशेष संज्ञा है 

मत्स्य जयन्ती 

कुर्म जयन्ती 

वाराह जयन्ती

कल्कि जयन्ती 


भगवान के जन्मोत्सव को जयन्ती ही कहा गया है शास्त्रों में।


आजकल कुछ ज्यादा पढ़े लिखे लोग जयन्ती का अर्थ हल्के में लेते हैं। 


सामान्य व्यक्ति के जन्मदिन से इसे नहीं जोड़ें।


जयन्ती शब्द  जन्मोत्सव से अधिक प्रभावी और गम्भीर है।


कथाव्यास कैलाश जी शास्त्री 

श्री राधे ज्योतिष दरबार, शास्त्री नगर, गवालू (नागौर) राज.

Whatsapp 9001520008


Saturday, August 24, 2024

ऊब छठ

भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की छठ

ऊब छठ का व्रत और पूजा विवाहित स्त्रियां पति की लंबी आयु के लिए तथा कुंआरी लड़कियां अच्छे पति की कामना के लिये करती है। भाद्र पद महीने की कृष्ण पक्ष की छठ (षष्टी तिथि) ऊब छठ होती है। ऊब छठ को चन्दन षष्टी , चन्ना छठ  और चाँद छठ के नाम से भी जाना जाता है।
✴️🕉️भगवान कृष्ण के भ्राता बलराम का जन्म दिन शनिवार
भाद्र पद महीने की कृष्ण पक्ष की छठ को ऊब छठ ‘चंदन षष्ठी’ के रूप में धूमधाम से मनाया जाएगा। शाम ढलने के बाद व्रत रखने वाली महिलाए और कुंआरी लड़कियां ने मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शन के साथ, परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करेंगी । महिलाए रात्रि में चंद्रोदय के बाद, अध्र्य देकर पूजा करने के बाद व्रत का पालना करेंगी।
💠ऊब छठ का व्रत रखने वाली महिलाए और कुंआरी लड़कियां सूर्यास्त के बाद से चंद्रोदय तक खड़े रहकर पौराणिक कथाओं का श्रवण करेंगी। साथ ही मंदिरों में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा अर्चना की जाएगी!
✴️✴️🕉️ऊब छठ क्यो कहते है🕉️✴️✴️
ऊब छठ के दिन मंदिर में भगवान की पूजा की जाती है। चाँद निकलने पर चाँद को अर्ध्य दिया जाता है। उसके बाद ही व्रत खोला जाता है। सूर्यास्त के बाद से लेकर चाँद के उदय होने तक खड़े रहते है। इसीलिए इसको ऊब छठ कहते है।
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कथाव्यास कैलाशजी शास्त्री(खांडल)
श्री राधे ज्योतिष दरबार,
शास्त्री नगर, गवालू (नागौर) राज.
Whatsapp 9001520008

Wednesday, January 11, 2023

Makar Sankranti 2023


मकर संक्रांति का वास 🚩

🙏🙏🙏🙏🙏🙏

१.लौकिक मतानुसार

रविवार - शाह वैश्य 

सोमवार धोबी रजक

मंगलवार कुम्हार

बुध गुरु शुक्र - माली वन 

शनिवार - दुष्ट जन , पापात्मा 

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२.मतान्तर सूत्र


वर्ष समय निवास यही मकर संक्रांति निवास भी


रोहिणी निवास अगर 


समुद्र - माली के घर 

संधि - वैश्य के घर 

पर्वत - कुम्हार के घर 

तट - धोभी के घर 

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वासा दुष्टमानव क्योंकि शनिवार को संक्रांति है 

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रोहिणी निवास -  सागर

समय निवास - माली गृह 

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 संक्रांति निवास और रोहिणी निवास के आधार पर निकले समय निवास दोनो ही अलग है !!!

Friday, December 30, 2022

तीतरी रामस्नेही रामद्वारा भागवत कथा by कथाव्यास कैलाशजी शास्त्री खांडल

 नागौर जिले के तीतरी गांव के रामद्वारा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का आनंद के साथ विश्राम हुआ।






इस अवसर पर कथा व्यास कैलाश शास्त्री खांडल ने भगवान श्रीकृष्ण तथा सुदामा के जीवन चरित्र,रूक्मणी विवाह,कंस वंध सहित अनेक विषयों पर विस्तार से श्रद्धालुओं को बताया

उन्होंने बताया कि जैसे कृष्ण ने सुदामा के साथ मित्रता धर्म निभाया हमें भी उनकी मित्रता का अनुसरण करना चाहिए

शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके  श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। कथा व्यास शास्त्री ने कहा कि सभ्य एवं संस्कारित समाज निर्माण के लिए सदैव गीता का अनुसरण करते रहना चाहिएं, जो काम प्रेम के माध्यम से संभव है, वह हिंसा से संभव नहीं हो सकता हैं।



कथाव्यास शास्त्री ने युवा वर्ग को नशे से दुर रहने की बात भी बताई और कहा कि नशे से हमारे शरीर का नुक़सान तथा बुद्धि का विनाश भी होता है जिससे आत्मिक शांति भी प्राप्त नहीं होती है। उन्होंने कहा कि हमें गौसेवा भी करनी चाहिए क्योंकि गाय मे ३३ कोटि देवताओं का वास होता है तथा गौसेवा सर्वश्रेष्ठ सेवा का माध्यम है और सात दिनों तक आयोजित भागवत कथा में भजन गायक अनिल सैन, सुनिता स्वामी ने भी कथा पांडाल में भजनों की प्रस्तुति दी जिससे श्रद्धालु खुशी से नृत्य करते दिखे। 

इस सात दिवसीय भागवत कथा में तीतरी जोधियासी सहित आस-पास के अनेकों गांव के श्रद्धालुओं सहित काफी संख्या में महिला-पुरूष भक्तों ने इस कथा का आनंद उठाया। सात दिनों तक आयोजित इस पावन कथा में पुरा वातावरण भक्तिमय रहा।