Friday, September 20, 2019
Saturday, September 7, 2019
Veer teja दशमी
कैलाश शास्त्री(खाण्डल) गवालू नागौर
https://maps.app.goo.gl/2gZwki4V26zB4FgA8
भागवत कथा
कल रात्रि तीसरे दिन की कथा की कुछ मीडिया कवरेज ।
कथाव्यास- कैलाश जी शास्त्री(खाण्डल) गवालू वाले
स्थान- बायांसा मन्दिर रूण(नागौर)राज.
कॉल- 9001520008
Tuesday, September 3, 2019
Sunday, September 1, 2019
भागवत कथा
🙏🏻 *राधे राधे*🙏🏻
!!!सर्वजन हितार्थ!!!
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 5वीं
गणपति स्थापना के उपलक्ष में
श्री मद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ
का आयोजन।।
दिनाँक - 4 से 10 सितंबर 2019
रात्रि *7:30 से 11:30 बजे कथाव्यास -
*राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रद्धेय श्री कैलाश जी शास्त्री(खाण्डल)*
कॉल- *9001520008*
कथा स्थल-
बांयासा मन्दिर प्रांगण,
रूण 【नागौर"】 राजस्थान!
*आपकी उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है* ।।
#ShriMadBhagwatKatha
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Thursday, August 22, 2019
ज्योतिष astrology
ज्योतिष को लोग धार्मिक दृष्टि से देखते है लेकिन यह एक विज्ञान है ।
ज्योतिष से पृथ्वी पर ग्रहों ,तारो ओर खगोलीय घटनाओं के शुभ या अशुभ प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। वास्तविक स्थिति जानने के लिए गणित ज्योतिष विशेष रूप से सहायक होती है।
बालक के जन्म समय या कह सकते है कि इस क्षण जो ग्रह ,नक्षत्र की स्थिति है उसी आधार पर बालक का चरित्र, स्वभाव सूर्य चन्द्रमा जैसे ग्रहों से समझा जा सकता है। ।
ज्योतिष अर्थात ज्योति प्रदान करने वाला विज्ञान है । ज्योतिष विज्ञान में चार चरणों वाले सत्ताईस नक्षत्र ,द्वादश राशियां ओर नौ ग्रह में वर्गीकृत किया गया है ।
कोई भी व्यक्ति कितना भी नास्तिक हो लेकिन जब उसके जीवन मे संकट का दौर गुजरता है तब ज्योतिषी के पास जरूर आता है ।
ज्योतिषी का शुद्ध भाव के साथ अपनी स्थिति बताता है यानी ज्योतिष डूबते हुए को तिनका का सहारा देने में भी सिद्ध हुई है ।
एक अच्छे ज्योतिषी को चाहिए कि वो व्यक्ति की महादशा,अन्तर्दशा ,ग्रह प्रभाव के आधार पर मन्त्र,दान,उपाय इत्यादि का प्रयोग बताकर उचित मार्गदर्शन देना चाहिये । ज्योतिष जीवन मे अपना लक्ष्य प्राप्त करने का सही रास्ता दिखा सकता है ।
ज्योतिष वेद का अंग है 'वेदस्य निर्मलम चक्षु , यह वेद का निर्मल नेत्र है ।
सभी को ज्ञात है कि आकाशगंगा में स्थित सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपने निश्चित समय मे एक निश्चित धुरी पर जो ग्रह जितना दूर है अपनी-2 कक्षा में चक्र लगाते है ।
ज्योतिष का सम्बंध आकाशीय पिंडो की चाल पर जानकारी प्रदान करता है ।
Astrologer kailash shastri(khandal)
Shri radhe jyotish(astrology centar)darbar
Shastri nagar, gawaloo (nagaur) rajasthan
Branch surat -gujrat
Ichalkaranji maharashtra
Call-9001520008
Email- kailashshastri.ks11@gmail.com
Wednesday, August 21, 2019
कृष्ण जन्माष्टमी -jnmastmi
साभार- वैदिक यात्रा गुरुकुल
जन्माष्टमी इस बार कब है पूरा प्रमाण सहित -
*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब मनावें ?*
*शास्त्रोक्त मंथन व निष्कर्ष*
*निशीथे तमउद्भूते जायमाने जनार्दने ।*
*देवक्यां देवरूपिण्यां विष्णु: सर्वगुहाशय: ॥*
(श्रीमद्भागवत महापुराण* १०/०३/०८)
*मंथन:*
दिनाङ्क २३/०८/२०१९ को सूर्योदय से सप्तमी व लगभग प्रात:८:०८ के उपरान्त अष्टमी तिथि है जो कि अर्धरात्रि के समय भी रहेगी ।
दिवा वा यदि वा रात्रौ नास्ति चेद्रोहिणी कला ।
रात्रि युक्ता प्रकुर्वीत विशेषेणेन्दु संयुताम् ॥
( भविष्य पुराण )
अर्थात् दिन व रात्रि की घड़ी में यदि रोहिणी नक्षत्र न हो तो चन्द्रोदय के समय वर्तमान रात्रि की अष्टमी को जन्माष्टमी का व्रत करें ।
अतएव एक मत के अनुसार उक्त दिन रात्रि में केवल अष्टमी तिथि ग्राह्य होने के कारण कुछ लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी २३ अगस्त २०१९ को मना रहे हैं ।
परन्तु; निर्णय सिन्धु के अनुसार
*पूर्वविद्धाष्टमी या तु उदये नवमीदिने ।*
*मूहुर्तमपिसंयुक्ता सम्पूर्णौ साष्टमी भवेत् ॥* *कलाकाष्ठामुहूर्तापि यदा कृष्णाष्टमीतिथि: ।*
*नवम्यां सैव ग्राह्या स्यात्सप्तमीसंयुता न हि ॥*
( पद्मपुराण, निर्णय सिंधु, परिच्छेद २ )
अर्थात् सूर्योदय से युक्त अष्टमी संग नवमी तिथि को ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मान्य करनी चाहिये । अष्टमी युक्त नवमी ग्राह्य है, परन्तु; सप्तमी युक्त अष्टमी नहीं । यही बात ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी स्पष्ट है कि -
*प्रात: संकल्पकालव्याप्तेराधिक्यात् ।*
*वर्जनीया प्रयत्नेन सप्तमीसंयुताष्टमी ॥*
इति *ब्रह्मवैवर्ताच्च*
( निर्णय सिंधु )
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार भगवान् श्रीकृष्ण का प्राकट्य भादों कृष्णपक्ष, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि के चन्द्र तथा सिंह राशि के सूर्य आदि में हुआ ।
दिनाङ्क २४/०८/२०१९, शनिवार को सूर्योदय से लगभग प्रात: ८:३१ तक अष्टमी, तदोपरान्त नवमी है तथा ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार उपरोक्त योग भी बन रहा है । प्रात: सूर्योदय के समय वृष के चन्द्रमा हैं, जो रात्रि १२ बजे भी रहेंगे तथा सिंह के सूर्य और अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र का भी सुयोग है ।
*निष्कर्ष:* उपरोक्त शास्त्र-मंथन *वैदिक यात्रा शोध-केन्द्र* द्वारा प्रमाणित है । अत: दिनाङ्क *२४/०८/२०१९* को *अर्धरात्रि* में ही *श्रीकृष्ण प्राकट्योत्सव* मनाना चाहिए ।
*वैदिक यात्रा परिवार*
वैदिक यात्रा गुरुकुल ( भागवत विद्यालय )
श्री अमरनाथ धाम
श्री श्रीनाथ शास्त्री जी पथ ( गाँधी मार्ग )
वृन्दावन - २८११२१
