Monday, December 30, 2019
भागवत कथा
राधे राधे
पांचवे दिन की कथा की झलकियां ।
सम्पर्क- 9001520008
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Bhagwat ktha, nani bai ro mayro
Tuesday, December 3, 2019
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Monday, November 18, 2019
भागवतचार्य
सूचना-💐💐💐
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शास्त्री नगर,#गवालू(नागौर)राज.
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Friday, September 20, 2019
Navratri - नवरात्रि 2019
नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त - आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा , रविवार, 29 सितम्बर 2019
समय- प्रातः 9:30 से 12:28 तक लाभ-अमृत वेला
दोपहर - 12:04 से 12:52 अभिजीत मुहूर्त
रात्रि शब्द सिद्धि का भी प्रतीक माना जाता है । देवी की उपासना प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि,नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ की जाती है । नवरात्रि वर्ष में चार बार होती है- चैत्र,आषाढ़ ,आश्विन,पोष ।
इनमें आषाढ़ ओर पोष मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के रूप में होती है । नौ दिनों में नवदुर्गा की पूजा महाकाली, महालक्ष्मी,महासरस्वती के रूपों की पूजा होती है ।
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी ।
तृतीयं चद्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पञ्चमं स्कन्दमातेती षष्ठम् कात्यायनी च ।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिताः ।।
इस प्रकार नवदुर्गा ओर दस महाविद्याओं में महाकाली को प्रमुख माना जाता है ।
नवरात्रि में दुर्गासप्तशती का पाठ करना अनन्त पुण्य ओर फलदायी होता है ।
इसे दुर्गा ओर चंडीपाठ भी कहा जाता है ।।
दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान सौ पाठ से शतचण्डी , हजार पाठ से सहस्त्र चण्डी, लाख पाठ से लक्षचण्डी इस प्रकार विशेष अनुष्ठान किये जाते है ।
आश्विन मास में जो नवरात्रि आती है उसे शारदीय नवरात्रि भी कहा जाता है । दुर्गासप्तशती के 12 वां अध्याय में 12-13 श्लोक जिसमे देवी खुद कहती है -
''शरत्काले महापूजा क्रियते या च वार्षिकी ।
तस्यां ममैतन्महात्म्यम् श्रुत्वा भक्तिसमन्वित: ।।
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः ।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय ।।
◆शरत्काल में जो वार्षिक महापूजा की जाती है उस पर्व पर मेरे जो इस माहात्म्य को भक्तिपूर्वक सुनेगा,वह मनुष्य मेरे प्रसाद से सब बाधाओं के मुक्त होकर धन-धान्य तथा पुत्र से सम्पन्न होगा इसमें तनिक भी संदेह नही है ।
●यह माहात्म्य दुर्गासप्तशती के नाम से प्रसिद्ध है ।
दुर्गा पाठ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों पुरुषार्थ प्रदान करने वाला है । माता का भक्त भाव,श्रद्धा और जिस कामना से साथ सप्तशति का पारायण करता है उसे उसी भावना के अनुरूप निश्चय फल सिद्धि होती है । इस प्रकार नौ दिन तक देवी के स्वरूपों का पूजन करें । नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा होती है । इस दिन योगी,सिद्धपुरुष कई प्रकार मन्त्रों की सिद्धि भी करते है । इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान से पूजन-अर्चन एवम हवन करना चाहिये । आहुति में दुर्गा का मूल मंत्र जिसे नवार्ण मन्त्र कहा जाता है ।
" ॐ ऐम् ह्रीं क्लीम् चामुण्डायै विच्चे ''
इस मन्त्र से भी आहुति देनी चाहिये । देवी सभी भक्तों को साधना और तप के प्रभाव से लौकिक ओर परलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति करती है । नवें दिन फल,हलवा,पूड़ी, काले चने ओर नारियल का भोग लगाया जाता है । उसके बाद कंवारी कन्याओं ओर ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिये, मां के प्रसाद के साथ चरण स्पर्श कर दान-दक्षिणा देनी चाहिये । इस भोजन के बाद मां को विदाई दी जाती है यानी उतरपूजन किया जाता है ।
■या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।।
★★★★★■■■■■★★★★★
विशेष पूजन,अर्चना,दुर्गा पाठ एवम अन्य पूजन समन्धित अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क-
भागवताचार्य कैलाश जी शास्त्री(खाण्डल)
श्री राधे ज्योतिष दरबार
शास्त्री नगर,गवालू (नागौर)राजस्थान
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Saturday, September 7, 2019
Veer teja दशमी
कैलाश शास्त्री(खाण्डल) गवालू नागौर
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भागवत कथा
कल रात्रि तीसरे दिन की कथा की कुछ मीडिया कवरेज ।
कथाव्यास- कैलाश जी शास्त्री(खाण्डल) गवालू वाले
स्थान- बायांसा मन्दिर रूण(नागौर)राज.
कॉल- 9001520008
Tuesday, September 3, 2019
Sunday, September 1, 2019
भागवत कथा
🙏🏻 *राधे राधे*🙏🏻
!!!सर्वजन हितार्थ!!!
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 5वीं
गणपति स्थापना के उपलक्ष में
श्री मद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ
का आयोजन।।
दिनाँक - 4 से 10 सितंबर 2019
रात्रि *7:30 से 11:30 बजे कथाव्यास -
*राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रद्धेय श्री कैलाश जी शास्त्री(खाण्डल)*
कॉल- *9001520008*
कथा स्थल-
बांयासा मन्दिर प्रांगण,
रूण 【नागौर"】 राजस्थान!
*आपकी उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है* ।।
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Thursday, August 22, 2019
ज्योतिष astrology
ज्योतिष को लोग धार्मिक दृष्टि से देखते है लेकिन यह एक विज्ञान है ।
ज्योतिष से पृथ्वी पर ग्रहों ,तारो ओर खगोलीय घटनाओं के शुभ या अशुभ प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। वास्तविक स्थिति जानने के लिए गणित ज्योतिष विशेष रूप से सहायक होती है।
बालक के जन्म समय या कह सकते है कि इस क्षण जो ग्रह ,नक्षत्र की स्थिति है उसी आधार पर बालक का चरित्र, स्वभाव सूर्य चन्द्रमा जैसे ग्रहों से समझा जा सकता है। ।
ज्योतिष अर्थात ज्योति प्रदान करने वाला विज्ञान है । ज्योतिष विज्ञान में चार चरणों वाले सत्ताईस नक्षत्र ,द्वादश राशियां ओर नौ ग्रह में वर्गीकृत किया गया है ।
कोई भी व्यक्ति कितना भी नास्तिक हो लेकिन जब उसके जीवन मे संकट का दौर गुजरता है तब ज्योतिषी के पास जरूर आता है ।
ज्योतिषी का शुद्ध भाव के साथ अपनी स्थिति बताता है यानी ज्योतिष डूबते हुए को तिनका का सहारा देने में भी सिद्ध हुई है ।
एक अच्छे ज्योतिषी को चाहिए कि वो व्यक्ति की महादशा,अन्तर्दशा ,ग्रह प्रभाव के आधार पर मन्त्र,दान,उपाय इत्यादि का प्रयोग बताकर उचित मार्गदर्शन देना चाहिये । ज्योतिष जीवन मे अपना लक्ष्य प्राप्त करने का सही रास्ता दिखा सकता है ।
ज्योतिष वेद का अंग है 'वेदस्य निर्मलम चक्षु , यह वेद का निर्मल नेत्र है ।
सभी को ज्ञात है कि आकाशगंगा में स्थित सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपने निश्चित समय मे एक निश्चित धुरी पर जो ग्रह जितना दूर है अपनी-2 कक्षा में चक्र लगाते है ।
ज्योतिष का सम्बंध आकाशीय पिंडो की चाल पर जानकारी प्रदान करता है ।
Astrologer kailash shastri(khandal)
Shri radhe jyotish(astrology centar)darbar
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Branch surat -gujrat
Ichalkaranji maharashtra
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Wednesday, August 21, 2019
कृष्ण जन्माष्टमी -jnmastmi
साभार- वैदिक यात्रा गुरुकुल
जन्माष्टमी इस बार कब है पूरा प्रमाण सहित -
*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब मनावें ?*
*शास्त्रोक्त मंथन व निष्कर्ष*
*निशीथे तमउद्भूते जायमाने जनार्दने ।*
*देवक्यां देवरूपिण्यां विष्णु: सर्वगुहाशय: ॥*
(श्रीमद्भागवत महापुराण* १०/०३/०८)
*मंथन:*
दिनाङ्क २३/०८/२०१९ को सूर्योदय से सप्तमी व लगभग प्रात:८:०८ के उपरान्त अष्टमी तिथि है जो कि अर्धरात्रि के समय भी रहेगी ।
दिवा वा यदि वा रात्रौ नास्ति चेद्रोहिणी कला ।
रात्रि युक्ता प्रकुर्वीत विशेषेणेन्दु संयुताम् ॥
( भविष्य पुराण )
अर्थात् दिन व रात्रि की घड़ी में यदि रोहिणी नक्षत्र न हो तो चन्द्रोदय के समय वर्तमान रात्रि की अष्टमी को जन्माष्टमी का व्रत करें ।
अतएव एक मत के अनुसार उक्त दिन रात्रि में केवल अष्टमी तिथि ग्राह्य होने के कारण कुछ लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी २३ अगस्त २०१९ को मना रहे हैं ।
परन्तु; निर्णय सिन्धु के अनुसार
*पूर्वविद्धाष्टमी या तु उदये नवमीदिने ।*
*मूहुर्तमपिसंयुक्ता सम्पूर्णौ साष्टमी भवेत् ॥* *कलाकाष्ठामुहूर्तापि यदा कृष्णाष्टमीतिथि: ।*
*नवम्यां सैव ग्राह्या स्यात्सप्तमीसंयुता न हि ॥*
( पद्मपुराण, निर्णय सिंधु, परिच्छेद २ )
अर्थात् सूर्योदय से युक्त अष्टमी संग नवमी तिथि को ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मान्य करनी चाहिये । अष्टमी युक्त नवमी ग्राह्य है, परन्तु; सप्तमी युक्त अष्टमी नहीं । यही बात ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी स्पष्ट है कि -
*प्रात: संकल्पकालव्याप्तेराधिक्यात् ।*
*वर्जनीया प्रयत्नेन सप्तमीसंयुताष्टमी ॥*
इति *ब्रह्मवैवर्ताच्च*
( निर्णय सिंधु )
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार भगवान् श्रीकृष्ण का प्राकट्य भादों कृष्णपक्ष, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि के चन्द्र तथा सिंह राशि के सूर्य आदि में हुआ ।
दिनाङ्क २४/०८/२०१९, शनिवार को सूर्योदय से लगभग प्रात: ८:३१ तक अष्टमी, तदोपरान्त नवमी है तथा ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार उपरोक्त योग भी बन रहा है । प्रात: सूर्योदय के समय वृष के चन्द्रमा हैं, जो रात्रि १२ बजे भी रहेंगे तथा सिंह के सूर्य और अर्धरात्रि में रोहिणी नक्षत्र का भी सुयोग है ।
*निष्कर्ष:* उपरोक्त शास्त्र-मंथन *वैदिक यात्रा शोध-केन्द्र* द्वारा प्रमाणित है । अत: दिनाङ्क *२४/०८/२०१९* को *अर्धरात्रि* में ही *श्रीकृष्ण प्राकट्योत्सव* मनाना चाहिए ।
*वैदिक यात्रा परिवार*
वैदिक यात्रा गुरुकुल ( भागवत विद्यालय )
श्री अमरनाथ धाम
श्री श्रीनाथ शास्त्री जी पथ ( गाँधी मार्ग )
वृन्दावन - २८११२१

